श्री जयप्रकाश श्रीवास्तव केन्द्रीय विद्यालय संगठन से सेवा निवृत्त शिक्षक हैं। 9 मई सन 1951 को नरसिंहपुर ,मध्यप्रदेश में इनका जन्म हुआ। "मन का साकेत " इनका प्रथम प्रकाशित गीत संग्रह है। नवगीत अर्धशती के यशस्वी नवगीतकार स्व . पं . श्यामनारायण मिश्र द्वारा सम्पादित गीत संग्रह "महाकौशल प्रांतर की 100 प्रतिनिधि रचनाय्रें " में भी आपके गीत संकलित हैं। यहाँ उनका एक गीत प्रस्तुत है।
काँच सा मन
जरा सी बात पर क्यों
टूटता है ,
कांच सा मन
गल रहे अनुबंध
निर्वासित हुई सौगंध
साँसों में कसकते हैं
अनगाए मधुर सम्बन्ध
रात के अंधे अंधे पहर क्यों
तापता है ,
आँच सा मन
तृप्ति का एहसास
होंठों पर सुलगती प्यास
आँखों में महकते है
सपनों के खिले मधुमास
झूठ के फिर आवरण क्यों
ओढ़ता है
साँच सा मन
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