Friday, 10 May 2013

JAYPRAKASH SHRIVASTAVA KA EK GEET

   
                     श्री जयप्रकाश श्रीवास्तव केन्द्रीय विद्यालय संगठन से सेवा निवृत्त शिक्षक  हैं। 9 मई सन 1951 को नरसिंहपुर ,मध्यप्रदेश में इनका  जन्म हुआ। "मन का साकेत " इनका प्रथम प्रकाशित गीत संग्रह है। नवगीत अर्धशती के यशस्वी  नवगीतकार स्व . पं . श्यामनारायण मिश्र द्वारा सम्पादित गीत संग्रह "महाकौशल प्रांतर की 100 प्रतिनिधि रचनाय्रें " में भी आपके गीत संकलित हैं। यहाँ उनका एक गीत प्रस्तुत है।


    काँच सा मन
जरा सी बात पर क्यों
टूटता है ,
कांच सा मन

गल रहे अनुबंध
निर्वासित हुई  सौगंध
साँसों में कसकते हैं
अनगाए  मधुर सम्बन्ध

रात के अंधे अंधे पहर क्यों
तापता है ,
आँच सा मन



तृप्ति का एहसास
होंठों पर सुलगती प्यास
आँखों में महकते है
सपनों के खिले मधुमास

झूठ के फिर आवरण क्यों
ओढ़ता है
साँच सा मन

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