जो भी अच्छी हैं वो यादें ज़रा सम्हालो तो.
बारहा ख़त वो पुराने पढ़ो निकालो तो.
ख़त्म सब जंगलात नफरतों के हो जाएँ
पौध गर प्यार की मिल-जुल के तुम उगा लो तो.
दूर हो जाएँगे अँधेरे जिन्दगी भर के;
आओ इंसानियत का इक चिराग बालो तो.
यहाँ भी लहलहाएगी फसल मोहब्बत की;
यकीं का बीज पुरयकीन हो के डालो तो.
ऐसी पुरतंज जुबान ले के कहाँ जाओगे;
इसकी तल्खी को मीठी चासनी में ढालो तो.
बारहा ख़त वो पुराने पढ़ो निकालो तो.
ख़त्म सब जंगलात नफरतों के हो जाएँ
पौध गर प्यार की मिल-जुल के तुम उगा लो तो.
दूर हो जाएँगे अँधेरे जिन्दगी भर के;
आओ इंसानियत का इक चिराग बालो तो.
यहाँ भी लहलहाएगी फसल मोहब्बत की;
यकीं का बीज पुरयकीन हो के डालो तो.
ऐसी पुरतंज जुबान ले के कहाँ जाओगे;
इसकी तल्खी को मीठी चासनी में ढालो तो.
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