Tuesday, 26 December 2017

अब कैकेयी बोलती - 6


अब कैकेयी बोलती
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प्रायश्चित में रत भरत,
भोग रहे अभिशाप।
कभी स्वप्न में भी नहीं,
किया जिन्होंने पाप।।

पक्षकार पूरा अवध,
मुझे किया प्रतिपक्ष।
अपवादों की सृष्टि में,
पहले ही थे दक्ष।।

शक्ति अमोघ निधान थे,
ऋषि, मुनि, गुरुकुल खेत।
उन्हें खटकता रहा है,
कैकेयी का प्रेत।।

पहले तो वीरांगना,
उस पर रीझे भूप।
राज-काज में दखल फिर,
सूझ-बूझ अनुरूप।।

समझौते का वचन का,
रहा सभी को ज्ञान।
राम राज्य अभिषेक का,
सुनियोजित अभियान।।

राजा अवस्थी, कटनी
27/12 /2017

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