अब कैकेयी बोलती
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क्या कौशल्या क्या सिया,
एक सभी के भाग,
विश्वासों के नाम पर,
संदेहों का नाग।।
जीवन भर जीती रहीं,
सीता जो विश्वास।
तुम्हीं कहो टूटा नहीं,
जब सौंपा वनवास।।
शौर्य शील अरु प्रेम पर,
जिसको था विश्वास।
अग्नि परीक्षा का दिया,
उसको ही संत्रास।।
कहाँ जानकी पर दिखा,
प्रेम और विश्वास।
अग्नि परीक्षा किसलिए,
क्यों सौंपा वनवास।।
मर्यादा कैसी रची,
मर्यादा के धाम।
सहती रहे प्रताड़ना,
त्रिया लोक के नाम।।
राजा अवस्थी, कटनी
29/12/2017
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