कैकेयी अब बोलती
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भरे रहे विश्वास से,
राम भरत के हेत।
अवध सहज स्वीकार ले,
रही चेतना चेत।।
पुरवासिन्ह को राम ने,
दिया यही संदेश।
भरत अवध के लिए शुभ,
अवध भरत का देश।।
उनको राजा मानना,
करे न कोई क्लेश।
पालन करिहहिं पुत्र सम,
भरत बनें अवधेश।।
भरत अवध के भूप हों,
रहे भूप का मान।
प्रजा पुत्र से भी बड़ी,
उनको है यह ज्ञान।।
राम - भरत के मध्य जो,
रहा प्रेम विश्वास।
फाँस न कोई आ सकी,
घटी न कोई आस।।
राजा अवस्थी, कटनी
02/01/2018
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