कैकेयी अब बोलती
-----------------------------------
हेर फेर अनगिन तरह,
भरत किए अनुरोध।
उल्टे समझाते रहे,
राम प्रबोध - प्रबोध।।
अवध शक्तिशाली नगर,
बलनिधि अवध कुमार।
बैठे सब त्यागे हुए,
अवध राज्य अधिकार।।
सबने ही कितना कहा,
लौट चलो अब राम।
रघुनंदन राजा बनो,
करो अवध सुखधाम।।
पिता गए जो सौंपकर,
पूरा कर वह काम।
तब ही लौटेंगे अवध,
दृढ़प्रतिज्ञ थे राम।।
भरत किसी भी तरह से,
नहीं चाहते राज।
राम न आना चाहते,
भूप वचन के काज।।
किया - धरा मेरा मिटा,
छोड़ गया बस आग।
भीतर - बाहर सब जला,
लहक रहे अब दाग।।
राजा अवस्थी, कटनी
15/01/2018
9617913287
No comments:
Post a Comment